
मेडिकल कालेज जौनपुर के चिकित्सको का शोध, प्रतिष्ठित मंच पर प्रकाशित होने पर प्रधानाचार्य ने स्नेहपूर्वक सम्मानित किया।
मेडिकल कालेज जौनपुर के चिकित्सको का शोध, प्रतिष्ठित मंच पर प्रकाशित होने पर प्रधानाचार्य ने स्नेहपूर्वक सम्मानित किया।
जौनपुर ( उत्तरशक्ति ) l उमानाथ सिंह स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय, जौनपुर के कम्युनिटी मेडिसिन विभाग के विभागाध्यक्ष डा० मुदित चौहान एवं सहायक आचार्य डा० पूजा पाठक के द्वारा योग विषय पर किए गए दो शोध पत्रों का प्रकाशन अटल बिहारी वाजपेई मेडिकल यूनिवर्सिटी, उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा प्रकाशित योगः इट्स रूल्स एंड हेल्थ एंड डिजीज’ पुस्तक में किया गया है। यह प्रकाशन योग के वैज्ञानिक, शैक्षणिक एवं स्वास्थ्य संबंधी महत्व को रेखांकित करता है तथा शोध एवं अकादमिक क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।”
प्रथम शोध में बताया गया है कि योग के माध्यम से यह प्रतिपादित किया गया कि बढ़ती आयु को सकारात्मक एवं स्वस्थ बनाया जा सकता है। योग न केवल शारीरिक स्वास्थ्य को सुदृढ़ करता है, बल्कि मानसिक संतुलन एवं आत्मिक शांति बनाए रखने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह भी बताया गया कि बढ़ती आयु के साथ उत्पन्न होने वाली शारीरिक एवं मानसिक चुनौतियों का समाधान नियमित योग अभ्यास द्वारा प्रभावी रूप् से किया जा सकता है। योग को जीवन का अभिन्न अंग बनाकर तथा इसे दैनिक दिनचर्या में सम्मिलित कर व्यक्ति अपने जीवन को अधिक स्वस्थ, संतुलित एवं रोगमुक्त बना सकता है।
द्वितीय शोध में यह प्रतिपादित्त किया गया कि योग का मानव जीवन में जुड़ाव वर्तमान समय की देन नहीं है, बल्कि इसकी गहरी पौराणिक एवं सांस्कृतिक जड़ें हैं। यद्यपि योग की उत्पत्ति प्राचीन काल में हुई, तथापि आधुनिक जीवन में भी इसकी प्रासंगिकता पूर्ववत बनी हुई है। वर्तमान परिप्रेक्ष्य में बढ़ते मानसिक तनाद, भावनात्मक असंतुलन एवं जीवनशैली जनित समस्याओं के समाधान हेतु योग की भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण हो गई है। शोध में यह स्पष्ट किया गया है कि योग पौराणिक परंपरा से जुड़ा होने के बावजूद आधुनिक समय में मानसिक एवं भावनात्मक स्वास्थ्य को सुदृढ़ करने का एक प्रभावी एवं व्यवहारिक माध्यम है।”
योग विषय पर किये गये शोध का प्रकाशन 02 वालूम में होने पर प्रधानाचार्य प्रो० आर०बी० कमल द्वारा संबंधित शोधकर्ता को हार्दिक शुभकामनाएँ एवं बधाई दी गई। प्रधानाचार्य ने शोधकर्ता के अकादमिक परिश्रम एवं बौद्धिक योगदान की सराहना करते हुए कहा कि इस प्रकार के शोध प्रकाशन संस्थान की शैक्षणिक प्रतिष्ठा को सुदृढ़ करतें है तथा चिकित्सा शिक्षा एवं स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में नवाचार को प्रोत्साहन देते है। प्रधानाचार्य ने मेडिकल कालेज के समस्त संकाय सदस्यों को अनुसंधान की दिशा में आगे बढ़ने, नवीन विषयों का चयन करने तथा अकादमिक मंचों पर अपने शोध कार्यों को प्रकाशित करने हेतु प्रेरित किया, जिससे संस्थान को राष्ट्रीय एवं राज्य स्तर पर एक सशक्त पहचान प्राप्त हो सके।’






