Take a fresh look at your lifestyle.

जौनपुर:ज़िंदगी तो सस्ती है,बस उसे गुज़ारने के तरीके महंगे हो गए है। डॉ. अंजना सिंह

0 120

 

जौनपुर:ज़िंदगी तो सस्ती है,बस उसे गुज़ारने के तरीके महंगे हो गए है। डॉ. अंजना सिंह 

जौनपुर ( उत्तरशक्ति )। ज़िंदगी तो सस्ती है, बस उसे गुज़ारने के तरीके महंगे हो गए है।यह पंक्ति अपने आप में आज के समय का सबसे सटीक आईना है। ज़िंदगी कभी महंगी नहीं थी-न कल थी, न आज है। महंगे तो हमने अपने शौक़, अपनी अपेक्षाएँ, और दूसरों से तुलना करने की आदत बना ली है।असल में ज़िंदगी को चलाने के लिए,ना महंगे कपड़े चाहिए, ना बड़ी गाड़ियाँ, ना चमकदार घर ज़िंदगी चलती है साँस, स्वास्थ्य, संबंध और संतोष से-और ये चारों चीज़ें आज भी मुफ्त मिलती हैं।पर हमने क्या किया। हमने सादगी को कमज़ोरी, संतोष को असफलता,और ठहराव को पीछे रह जान मान लिया। आज हर कोई,दिखाने में व्यस्त है, जीने में नहीं,फोन बदलना ज़रूरी हो गया, पर सोच बदलना नहीं

लोगों को प्रभावित करना ज़रूरी हो गया। पर अपने मन को समझना नहीं,महंगे तरीके कहाँ से आए।

तुलना से,पड़ोसी क्या चला रहा है, रिश्तेदार कहाँ घूम आया है। दोस्त कितना कमा रहा है।यहीं से ज़िंदगी महंगी होती है।दिखावे से,जो है उससे खुश रहने की बजाय,जो नहीं है उसे दिखाने की होड़,इच्छाओं की असीमित भूख से

ज़रूरतें सीमित होती हैं, पर इच्छाएँ कभी तृप्त नहीं होतीं

समय को पैसे से तौलने से आज आदमी,समय खरीदना चाहता है,पर अपनों को समय देना भूल गया है।सस्ती ज़िंदगी का सच,सुबह की चाय अगर शांति से पी जाए-तो वही लग्ज़री है।माँ की मुस्कान,पिता का आशीर्वाद,बच्चों की हँसी,इनका कोई EMI नहीं होता।रात को चैन की नींद आ जाए- तो समझिए आप सबसे अमीर हैं। असली महंगाई क्या है। तनाव, ईर्ष्या,अकेलापन,बेचैनी,दिखावे की मजबूरी ये सब बहुत महंगे पड़ते हैं-पैसों से नहीं, ज़िंदगी से

निष्कर्ष-ज़िंदगी आज भी उतनी ही सरल है,जितनी कभी थी,बस हमने,जीने को छोड़कर साबित करना शुरू कर दिया है। अगर हम,थोड़ा कम दिखाएँ, थोड़ा ज़्यादा महसूस करें,और थोड़ा अपने भीतर लौट आएँ

तो पता चलेगा -ज़िंदगी तो सच में सस्ती है,

बस उसे गुज़ारने के तरीके हमने खुद महंगे बना लिए हैं।

Naat Download Website Designer Lucknow

Best Physiotherapist in Lucknow

Best WordPress Developer in Lucknow | Best Divorce Lawyer in Lucknow | Best Advocate for Divorce in Lucknow