
मछलीशहर: तहसील गेट पर यातायात व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त-
मछलीशहर: तहसील गेट पर यातायात व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त-
अतिक्रमण,अवैध पार्किंग और पुलिस निष्क्रियता पर उठ रहे गंभीर सवाल
मछलीशहर,जौनपुर ( उत्तरशक्ति ) lतहसील मछलीशहर गेट के सामने मुख्य मार्ग पर प्रतिदिन लगने वाली भीषण जाम अब केवल लोक-समस्या नहीं, बल्कि प्रशासनिक लापरवाही का जीवंत प्रमाण बन चुका है। हालात इतने विकट हो गए हैं कि दो से तीन घंटे तक रास्ता अवरुद्ध रहना यहाँ की सामान्य दिनचर्या का हिस्सा हो गया है। एंबुलेंस,स्कूली बच्चे, परीक्षार्थी और आम नागरिक—सभी इस अव्यवस्था का प्रतिदिन शिकार बन रहे हैं। ऐसी जाम की समस्या को लेकर नगर पंचायत मछलीशहर भी कम दोषी नहीं है। समय-समय पर अतिक्रमण के खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए थी जो कभी नहीं होती।सड़कों पर अतिक्रमण का ‘खुला उल्लंघन’, पुलिस मूक दर्शक: नागरिकों का आरोप स्थानीय निवासियों के अनुसार सड़क के दोनों ओर ठेला-खोमचा संचालकों और दुकानदारों ने मनमाने ढंग से अतिक्रमण कर लिया है और दुकानदार वाहन हटाने को कहते हैं तो मारपीट की नौबत आ जाती है। वहीं टू-व्हीलर और फोर-व्हीलर चालकों द्वारा दोनों ओर वाहन खड़े कर दिए जाने से सड़क का वास्तविक उपयोग लगभग समाप्त हो जाता है।नागरिकों का स्पष्ट आरोप है कि ट्रैफिक पुलिस की लगातार अनुपस्थिति तथा प्रशासन की उदासीनता के कारण स्थिति दिन-ब-दिन भयावह होती जा रही है।कुछ लोगों ने यह भी कहा कि यह परिस्थिति किसी भी संवेदनशील न्यायिक टिप्पणी के कसौटी पर खरा उतरे तो इसे पुलिस की कर्तव्य हीनता का प्रत्यक्ष उदाहरण माना जाएगा।स्कूली बच्चों और मरीजों का जीवन दाँव पर,अभिभावकों में आक्रोश वाहनों की अथाह भीड़ के बीच स्कूल जाने वाले बच्चों और परीक्षार्थियों को अक्सर घंटों तक इंतज़ार करना पड़ता है। कई बार बच्चे अपने परीक्षा-केंद्रों तक समय पर नहीं पहुँच पाते।वहीं एंबुलेंस अक्सर जाम में फँस जाती हैं, जिससे मरीजों की जान तक जोखिम में पड़ जाती है—यह गंभीर स्थिति किसी भी संवेदनशील प्रशासन के लिए चेतावनी साबित हो सकती है।न्यायालय जैसी कठोर व्यवस्था की माँग: नागरिकों की आवाज़ हुई बुलंद।क्षेत्रवासियों ने कहा कि यदि सड़क से नियमित अतिक्रमण हटाने, नो-पार्किंग जोन लागू करने, और ट्रैफिक पुलिस की सतत तैनाती की व्यवस्था सुनिश्चित न की गई, तो यह मामला उच्च अधिकारियों के समक्ष न्यायिक हस्तक्षेप के लिए ले जाना अनिवार्य हो सकता है।लोगों ने प्रशासन से यह भी अपेक्षा जताई है कि यातायात की व्यवस्था को न्यायालय जैसी सख़्ती के साथ लागू किया जाए, अन्यथा स्थिति किसी बड़े हादसे का रूप ले सकती है।सीनियर रिपोर्टर टिप्पणी-मछलीशहर की यह व्यवस्था केवल स्थानीय समस्या नहीं, बल्कि यह इस बात का प्रतीक है कि प्रशासनिक तंत्र जब अपने मूल दायित्वों से विमुख होता है, तब एक आम सड़क भी नागरिकों के लिए ‘कानूनी संघर्ष’ का मैदान बन जाती है।इस मुद्दे का समाधान केवल कार्रवाई से नहीं,बल्कि दृढ़ इच्छा शक्ति और जवाबदेही से संभव है।








