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जौनपुर:- मस्जिद महमुदिया में तरावीह में कुरआन हुआ मुकम्मल, देश में अमन-भाईचारे के लिए मांगी गई दुआएं

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जौनपुर:- मस्जिद महमुदिया में तरावीह में कुरआन हुआ मुकम्मल, देश में अमन-भाईचारे के लिए मांगी गई दुआएं

जौनपुर (उत्तरशक्ति)। माहे रमज़ान के मुबारक महीने में तरावीह की नमाज़ के दौरान कुरआन-ए-पाक मुकम्मल होने का सिलसिला जारी है। इसी क्रम में जनपद जौनपुर के ग्राम गभिरन स्थित मस्जिद महमुदिया में 15 रमज़ान की रात तरावीह में कुरआन पाक मुकम्मल कराया गया।
मस्जिद महमुदिया ग्राम गभिरन में हाफ़िज़ अब्दुल समद एवं हाफ़िज़ अब्दुल रहीम पुत्र मो. असलम खां (अधिवक्ता) ने तरावीह की नमाज़ में मुकम्मल कुरआन सुनाने की सआदत हासिल की। इस मौके पर सैकड़ों की संख्या में रोज़ेदारों और नमाज़ियों ने शिरकत कर तरावीह की नमाज़ अदा की।
तरावीह मुकम्मल होने के बाद मस्जिद कमेटी की ओर से हाफ़िज़ अब्दुल समद और हाफ़िज़ अब्दुल रहीम की गुलपोशी कर उन्हें मुबारकबाद पेश की गई। कार्यक्रम के अंत में मुल्क में अमन-ओ-अमान, तरक्की और आपसी भाईचारे के लिए खास दुआएं मांगी गईं।
उत्तरशक्ति हिन्दी दैनिक के उप-सम्पादक इम्तियाज अहमद से बातचीत में हाफ़िज़ अब्दुल समद व हाफ़िज़ अब्दुल रहीम ने बताया कि तरावीह रमज़ान का चांद देखकर शुरू की जाती है और ईद का चांद देखकर समाप्त होती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह 16 दिन की विशेष तरावीह का इंतज़ाम था, लेकिन इसका यह मतलब नहीं है कि अब तरावीह की नमाज़ अदा नहीं की जाएगी।
उन्होंने रमज़ान की अहमियत पर रोशनी डालते हुए कहा कि रोज़ा केवल खाने-पीने से रुकने का नाम नहीं है, बल्कि इंसान के जिस्म के हर अंग का रोज़ा होना चाहिए। जब तक इंसान अपनी ज़ुबान, आंख, कान और हाथ-पैर को गुनाहों से नहीं बचाता, तब तक रोज़े की मुकम्मल हिफाज़त नहीं होती।
इस अवसर पर मो.असलम खां अधिवक्ता,मो.अकरम खां,मो. क़ासिम खां अधिवक्ता, अफसर ,अंसार ,दिलदार खां, सिकंदर खां, बाबर प्रधान, शमीम खां, जियाउल इस्लाम, सुलेमान खां, मो.अज़ीज़, समेत बड़ी संख्या में नमाज़ी मौजूद रहे।

जौनपुर (उत्तरशक्ति)। माहे रमज़ान के मुबारक महीने में तरावीह की नमाज़ के दौरान कुरआन-ए-पाक मुकम्मल होने का सिलसिला जारी है। इसी क्रम में जनपद जौनपुर के ग्राम गभिरन स्थित मस्जिद महमुदिया में 15 रमज़ान की रात तरावीह में कुरआन पाक मुकम्मल कराया गया।

मस्जिद महमुदिया ग्राम गभिरन में हाफ़िज़ अब्दुल समद एवं हाफ़िज़ अब्दुल रहीम पुत्र मो. असलम खां (अधिवक्ता) ने तरावीह की नमाज़ में मुकम्मल कुरआन सुनाने की सआदत हासिल की। इस मौके पर सैकड़ों की संख्या में रोज़ेदारों और नमाज़ियों ने शिरकत कर तरावीह की नमाज़ अदा की।

तरावीह मुकम्मल होने के बाद मस्जिद कमेटी की ओर से हाफ़िज़ अब्दुल समद और हाफ़िज़ अब्दुल रहीम की गुलपोशी कर उन्हें मुबारकबाद पेश की गई। कार्यक्रम के अंत में मुल्क में अमन-ओ-अमान, तरक्की और आपसी भाईचारे के लिए खास दुआएं मांगी गईं।

 

उत्तरशक्ति हिन्दी दैनिक के उप-सम्पादक इम्तियाज अहमद से बातचीत में हाफ़िज़ अब्दुल समद व हाफ़िज़ अब्दुल रहीम ने बताया कि तरावीह रमज़ान का चांद देखकर शुरू की जाती है और ईद का चांद देखकर समाप्त होती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह 16 दिन की विशेष तरावीह का इंतज़ाम था, लेकिन इसका यह मतलब नहीं है कि अब तरावीह की नमाज़ अदा नहीं की जाएगी।

उन्होंने रमज़ान की अहमियत पर रोशनी डालते हुए कहा कि रोज़ा केवल खाने-पीने से रुकने का नाम नहीं है, बल्कि इंसान के जिस्म के हर अंग का रोज़ा होना चाहिए। जब तक इंसान अपनी ज़ुबान, आंख, कान और हाथ-पैर को गुनाहों से नहीं बचाता, तब तक रोज़े की मुकम्मल हिफाज़त नहीं होती।

इस अवसर पर मो.असलम खां अधिवक्ता,मो.अकरम खां,मो. क़ासिम खां अधिवक्ता, अफसर ,अंसार ,दिलदार खां, सिकंदर खां, बाबर प्रधान, शमीम खां, जियाउल इस्लाम, सुलेमान खां, मो.अज़ीज़, समेत बड़ी संख्या में नमाज़ी मौजूद रहे।

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