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मेडिकल कालेज जौनपुर में विश्व कैंसर दिवस पर कैंसर जागरूकता शिविर का अयोजन।

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जौनपुर:मेडिकल कालेज जौनपुर में विश्व कैंसर दिवस पर कैंसर जागरूकता शिविर का अयोजन।

जौनपुर ( उत्तरशक्ति )। उमानाथ सिंह स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय, जौनपुर के प्रधानाचार्य प्रो0 आर0 बी0 कमल के दिशा निर्देश में जनरल सर्जरी विभाग, जनरल मेंडिसिन विभाग एवं आब्स एण्ड गायनी विभाग के द्वारा दिनांक 4 फरवरी, 2026 को विश्व कैंसर दिवस पर अस्पताल में कैंसर जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया। विश्व कैंसर जागरूकता शिविर के आयोजन का मुख्य उद्देश्य लोगों को कैंसर के बारे में सही जानकारी देना, समय रहते जांच के लिए प्रेरित करना और कैंसर से होने वाली मृत्यु दर को कम करना होता है।

कार्यक्रम का शुभारंभ प्रधानाचार्य प्रो0 आर0 बी0 कमल

द्वारा किया गया। इस अवसर पर अपने संबोधन में उन्होंने कैंसर विषय पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कहा कि किसी भी पुरूष/महिला को कैंसर संबंधी लक्षणों या समस्याओं के प्रति संकोच नहीं करना चाहिए तथा समय रहते विशेषज्ञ चिकित्सक से परामर्श लेकर आवश्यक जाँच अवश्य करानी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि प्रत्येक बीमारी का कोई-न-कोई उपचार उपलब्ध है, बशर्ते उसकी पहचान समय पर हो जाए।

प्रधानाचार्य महोदय ने विश्व कैंसर जागरूकता शिविर जैसे महत्वपूर्ण कार्यक्रम के सफल आयोजन हेतु मुख्य चिकित्सा अधीक्षक एवं मेडिसिन विभाग की सराहना करते हुए उन्हें धन्यवाद ज्ञापित किया तथा भविष्य में भी ऐसे जनहितकारी कार्यक्रमों के आयोजन की आवश्यकता पर बल दिया।

मुख्य चिकित्सा अधीक्षक प्रो0 ए. ए. जाफरी ने विश्व कैंसर दिवस के अवसर पर अपने संबोधन में कहा कि प्रत्येक कैंसर रोगी की स्थिति एवं उसकी बीमारी की प्रकृति अलग-अलग होती है। उन्होंने बताया कि कुछ मामलों में तंबाकू, गुटखा, शराब अथवा धूम्रपान के सेवन से धीरे-धीरे मुख संबंधी कैंसर विकसित होता है, जिसमें समय पर पहचान एवं उपचार प्रारंभ होने से रोगी का जीवन सुरक्षित किया जा सकता है। उन्होंने यह भी बताया कि इस मेडिकल कॉलेज में विभिन्न विशेषज्ञ विभागों के चिकित्सक उपलब्ध हैं, जो जनसामान्य को निःशुल्क चिकित्सकीय परामर्श एवं उपचार प्रदान कर रहे हैं। गंभीर अथवा जटिल मामलों में रोगियों को उच्च चिकित्सा केंद्र (हायर सेंटर) के लिए संदर्भित किया जाता है, जिससे रोगी के जीवन की रक्षा सुनिश्चित की जा सके। विशेष रूप से उन्होंने महिलाओं से अपील करते हुए कहा कि यदि स्तन में किसी प्रकार की गांठ (गिल्टी), असामान्य स्राव, आकार में परिवर्तन अथवा कोई अन्य असामान्य लक्षण दिखाई दें, तो बिना किसी संकोच के तत्काल चिकित्सक से संपर्क कर आवश्यक जाँच एवं उपचार कराना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि समय पर जाँच एवं उपचार ही कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से बचाव का सबसे प्रभावी उपाय है।

परीक्षा नियन्त्रक डा0 ले0 कर्नल सी.बी.एस. पटेल ने अपने संबोधन में दांत एवं मुख (ओरल) कैंसर से संबंधित लक्षणों एवं उसके उपचार के विषय में विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि मुख एवं दंत कैंसर के प्रमुख लक्षणों में मुंह में लंबे समय तक न भरने वाला घाव, दांत या मसूड़ों में लगातार दर्द, मुंह खोलने में कठिनाई, चबाने या निगलने में परेशानी, मुंह के भीतर सफेद या लाल धब्बे, दांतों का बिना कारण हिलना तथा जबड़े में सूजन अथवा गांठ का बनना शामिल है। उन्होंने यह भी बताया कि इस प्रकार के कैंसर का मुख्य कारण तंबाकू, गुटखा, पान, धूम्रपान एवं अत्यधिक शराब का सेवन है। उन्होंने लोगों से इन आदतों को त्यागने की अपील की तथा नियमित दंत परीक्षण कराने पर बल दिया।

स्त्री एवं प्रसूति रोग की विभागाध्यक्ष डॉ. सरिता पाण्डेय ने अपने संबोधन में ब्रेस्ट कैंसर तथा बच्चेदानी के मुंह (सर्वाइकल) से संबंधित कैंसर के विषय में विस्तृत जानकारी प्रदान की। उन्होंने बताया कि महिलाओं में इन कैंसरों की समय पर पहचान एवं रोकथाम अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने विशेष रूप से सर्वाइकल कैंसर की रोकथाम हेतु उपलब्ध वैक्सीन (इंडिया वर्जन HPV वैक्सीन) के महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि 9 से 15 वर्ष आयु वर्ग की लगभग 90 प्रतिशत बच्चियों का टीकाकरण किया जाना अत्यंत आवश्यक है, जिससे भविष्य में सर्वाइकल कैंसर के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि इस आयु वर्ग में दो डोज वैक्सीन पर्याप्त होती हैं, जबकि 15 वर्ष से अधिक एवं 45 वर्ष की आयु तक महिलाओं को तीन डोज वैक्सीन लगाए जाने की अनुशंसा की जाती है।

डॉ. पाण्डेय ने आगे बताया कि महिलाओं में यदि असामान्य रूप से पानी आना, अनियमित रक्तस्राव (ब्लीडिंग), माहवारी में गड़बड़ी, या किसी भी प्रकार का असामान्य लक्षण दिखाई दे, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए तथा तत्काल स्त्री रोग विशेषज्ञ से संपर्क कर आवश्यक जांच एवं उपचार कराना चाहिए।

टीबी एवं चेस्ट रोग विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. अचल सिंह ने अपने संबोधन में फेफड़ों से संबंधित होने वाले कैंसर के विषय में जानकारी प्रदान की। उन्होंने बताया कि फेफड़ों का कैंसर एक गंभीर एवं जानलेवा रोग है, जिसका प्रमुख कारण धूम्रपान, तंबाकू का सेवन, प्रदूषण तथा लंबे समय तक हानिकारक रसायनों के संपर्क में रहना है। तथा यह भी बताया कि फेफड़ों के कैंसर के प्रारंभिक लक्षणों में लगातार खांसी, खांसी में खून आना, सांस लेने में कठिनाई, सीने में दर्द, बार-बार सांस का संक्रमण, वजन का अचानक कम होना एवं अत्यधिक थकान शामिल हैं। उन्होंने कहा कि यदि इन लक्षणों को समय रहते पहचान लिया जाए और विशेषज्ञ चिकित्सक से परामर्श लेकर आवश्यक जांच कराई जाए, तो उपचार की संभावनाएं बढ़ जाती हैं। उन्होंने यह भी बताया कि फेफड़ों के कैंसर की पुष्टि के लिए एक्स-रे, सीटी स्कैन, बायोप्सी एवं अन्य आधुनिक जांच विधियों का प्रयोग किया जाता है तथा रोग की अवस्था के अनुसार दवा, कीमोथेरेपी, रेडियोथेरेपी अथवा शल्य चिकित्सा के माध्यम से उपचार किया जाता है।

बाल रोग विभाग के सहायक आचार्य डॉ. अरविन्द यादव ने अपने संबोधन में बच्चों में होने वाले कैंसर, विशेष रूप से एडवांस ब्रेन कैंसर के विषय में जानकारी देते हुए उपस्थित जनसमूह को जागरूक किया। उन्होंने बताया कि बच्चों में कैंसर के लक्षण कई बार सामान्य बीमारियों जैसे प्रतीत होते हैं, जिसके कारण समय पर पहचान नहीं हो पाती और रोग गंभीर अवस्था में पहुँच जाता है। डॉ. यादव ने बताया कि बच्चों में कैंसर के प्रमुख चेतावनी लक्षणों में लगातार बुखार रहना, शरीर में असामान्य गांठें (गिल्टी) होना, बार-बार उल्टी होना, सिरदर्द, चक्कर आना, वजन का तेजी से कम होना, अत्यधिक थकान, दौरे पड़ना, देखने या चलने में कठिनाई आदि शामिल हैं। उन्होंने विशेष रूप से कहा कि ब्रेन कैंसर के मामलों में सिरदर्द के साथ सुबह के समय उल्टी होना तथा बच्चे के व्यवहार में अचानक परिवर्तन दिखाई देना गंभीर संकेत हो सकते हैं।

उन्होंने अभिभावकों से अपील की कि यदि बच्चों में उपरोक्त लक्षण लंबे समय तक बने रहें या बार-बार उभरें, तो इसे नजरअंदाज न करते हुए तत्काल बाल रोग विशेषज्ञ से परामर्श लेकर आवश्यक जांच एवं उपचार कराएं। उन्होंने यह भी बताया कि समय पर निदान एवं सही उपचार से बच्चों में कैंसर का सफल इलाज संभव है।

इस अवसर पर मेडिकल कॉलेज के एक एमबीबीएस छात्र ने मंच से अपने जीवन के एक महत्वपूर्ण अनुभव को साझा करते हुए बताया कि उनके पिताजी कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से पीड़ित रहे हैं। बीमारी के दौरान उन्हें अनेक समस्याओं का सामना करना पड़ा, किंतु हमारे चिकित्सा शिक्षक प्रोफेसर आशीष यादव द्वारा समय पर दिए गए उचित मार्गदर्शन एवं निरंतर सहयोग के कारण उनके पिता का सही दिशा में उपचार संभव हो सका।

उप-प्रधानाचार्य प्रोफेसर आशीष यादव ने अपने संबोधन में संबंधित एमबीबीएस छात्र के पिताजी के उपचार के दौरान प्रदान किए गए सहयोग की चर्चा अत्यंत गौरवान्वित एवं प्रेरणादायक शब्दों में की। उन्होंने बताया कि समय पर सही चिकित्सकीय मार्गदर्शन, समन्वय एवं मानवीय संवेदना के साथ किया गया उपचार रोगी के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन ला सकता है। उन्होंने इस अवसर पर यह भी कहा कि चिकित्सक का दायित्व केवल उपचार तक सीमित नहीं होता, बल्कि रोगी एवं उसके परिवार को मानसिक संबल प्रदान करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।

चीफ प्रॉक्टर प्रोफेसर रुचिरा सेठी ने अपने संबोधन में अपने स्वयं के बच्चे के कैंसर उपचार से जुड़े व्यक्तिगत अनुभव को साझा किया। उन्होंने बताया कि उनके बच्चे के इलाज के दौरान चिकित्सकों द्वारा सुझाई गई प्रत्येक जांच, परामर्श एवं उपचार प्रक्रिया को उन्होंने पूर्ण विश्वास एवं अनुशासन के साथ अपनाया।

उन्होंने कहा कि उपचार की पूरी अवधि में चिकित्सकों की सलाह पर बिना किसी संदेह के अमल किया गया, जिसके परिणामस्वरूप बच्चे के स्वास्थ्य में उल्लेखनीय सुधार हुआ। प्रोफेसर सेठी ने अपने अनुभव के आधार पर यह स्पष्ट किया कि चिकित्सकों पर पूर्ण विश्वास रखते हुए, समय पर जांच एवं समुचित उपचार कराए जाने से कैंसर जैसी गंभीर बीमारी पर भी विजय पाई जा सकती है।

पूरे कार्यक्रम का सफल संचालन चिकित्सा अधीक्षक डॉ. विनोद कुमार द्वारा किया गया। अपने वक्तव्य में उन्होंने कैंसर जैसी गंभीर बीमारी के प्रति जनजागरूकता की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि केवल व्यक्तिगत स्तर पर ही नहीं, बल्कि परिवार एवं समाज के प्रत्येक वर्ग तक सही जानकारी पहुँचाना अत्यंत आवश्यक है।

कार्यक्रम के अंत में मेडिसिन विभाग के सहायक आचार्य डॉ. जितेंद्र कुमार ने सभी उपस्थितजनों के प्रति धन्यवाद ज्ञापित किया। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि कैंसर एक अत्यंत गंभीर बीमारी है, किंतु समय पर सही जाँच एवं समुचित उपचार के माध्यम से यह रोगी के लिए जीवनदान सिद्ध हो सकता है।

इस अवसर पर प्रो0 अमेश सरोज, प्रो0 भारतीय यादव, डा0 आशुतोष सिंह, डा0 हमजा अंसारी, डा0 चन्द्रभान, डा0 रोहित सरोज, डा0 रेनू , डा0 अभिषेक सिंह, डा0 अजय कुमार, डा0 जयसूर्या, डा0 जयन्त शर्मा, डा0 संदीप एवं अन्य चिकित्सक व कर्मचारीगण उपस्थित रहें।

 

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