
छह साल बाद मानीकलां समेत तीन स्टेशनों पर लौटेगी ट्रेन की रौनक, अब जागा जनप्रतिनिधियों का रेल प्रेम!
छह साल बाद मानीकलां समेत तीन स्टेशनों पर लौटेगी ट्रेन की रौनक, अब जागा जनप्रतिनिधियों का रेल प्रेम!
वाराणसी-अयोध्या रेलखंड पर मेमू स्पेशल ट्रेन के संचालन से यात्रियों को राहत, नियमित रेल सेवा बहाली की मांग ने फिर पकड़ा जोर
जौनपुर ( उत्तरशक्ति )। वाराणसी-अयोध्या रेलखंड पर सफर करने वाले यात्रियों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। त्योहारों के मद्देनजर रेलवे ने अयोध्या और वाराणसी के बीच मेमू स्पेशल ट्रेन चलाने का निर्णय लिया है। ट्रेन संख्या 04201/04202 का संचालन 18 अक्टूबर से 30 नवंबर 2026 तक निर्धारित किया गया है। कुल 44 फेरों वाली इस ट्रेन के ठहराव से जौनपुर जिले के तुलसीनगर, मानीकलां हॉल्ट और महंगावां हॉल्ट के यात्रियों को करीब छह साल बाद राहत मिलने की उम्मीद है।
रेलवे के इस फैसले से क्षेत्र के लोगों में खुशी है, लेकिन इसके साथ ही स्थानीय जनप्रतिनिधियों की भूमिका को लेकर सवाल भी उठने लगे हैं। लोगों का कहना है कि जब कोरोना काल के बाद से इस रेलखंड पर नियमित यात्री सेवा बंद पड़ी थी, तब यात्रियों की परेशानियों को दूर कराने के लिए भी ऐसी ही सक्रियता दिखाई जानी चाहिए थी।
कोरोना काल में बंद हुई ट्रेन, छह साल तक परेशान रहे यात्री
कोरोना काल से पहले इस रेलखंड पर अयोध्या से मुगलसराय, वर्तमान पंडित दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन, तक पैसेंजर ट्रेन का संचालन होता था। कोरोना महामारी के दौरान ट्रेन सेवा बंद हुई तो इसके बाद नियमित संचालन बहाल नहीं हो सका। इसका सीधा असर तुलसीनगर, मानीकलां और महंगावां हॉल्ट सहित आसपास के गांवों के यात्रियों पर पड़ा।
ट्रेन सेवा बंद होने से विद्यार्थियों, नौकरीपेशा लोगों, छोटे व्यापारियों और रोजाना आवागमन करने वाले यात्रियों को वैकल्पिक साधनों का सहारा लेना पड़ा। लोगों को समय और पैसे दोनों खर्च करने पड़े। लंबे समय से क्षेत्रवासी इस रेलखंड पर यात्री ट्रेन का संचालन दोबारा शुरू किए जाने की मांग कर रहे हैं।
मुद्दा उठने के बाद फिर चर्चा में आया रेलखंड
रेल सेवा बंद होने से यात्रियों को हो रही परेशानी का मुद्दा पिछले दिनों ‘बोलता पूर्वांचल’ ने प्रमुखता से उठाया था। इसके माध्यम से क्षेत्र के लोगों की समस्याओं और बंद पड़े स्टेशनों पर रेल सेवा बहाल करने की जरूरत को सामने लाया गया था।
अब जब रेलवे ने मेमू स्पेशल ट्रेन चलाने का निर्णय लिया है, तो रेलमंत्री के प्रति आभार जताने की चर्चाएं भी शुरू हो गई हैं। ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है कि जब यात्री वर्षों से परेशान थे, तब उनकी आवाज संबंधित अधिकारियों और रेलवे मंत्रालय तक प्रभावी ढंग से पहुंचाने के लिए कितने प्रयास किए गए?
जनप्रतिनिधियों की जिम्मेदारी केवल किसी सुविधा की घोषणा के बाद उसका स्वागत करना नहीं, बल्कि जनता की समस्याओं को समय रहते उठाना और उनके समाधान के लिए लगातार प्रयास करना भी है। हालांकि, इस मामले में जनप्रतिनिधियों के प्रयासों को लेकर अलग से आधिकारिक जानकारी सामने आना बाकी है।
स्पेशल ट्रेन से राहत, लेकिन नियमित सेवा का इंतजार
रेलवे के इस फैसले का स्वागत किया जाना चाहिए, क्योंकि इससे त्योहारों के दौरान यात्रियों को सुविधा मिलने की उम्मीद है। लेकिन निर्धारित अवधि तक चलने वाली स्पेशल ट्रेन को स्थायी समाधान नहीं माना जा सकता। यात्रियों की वास्तविक जरूरत नियमित यात्री ट्रेन की बहाली है, जिससे वे पूरे साल आसानी से सफर कर सकें।
क्षेत्रीय लोगों की मांग है कि रेलवे इस रेलखंड पर नियमित ट्रेन सेवा शुरू करने और संबंधित हॉल्टों पर ठहराव सुनिश्चित करने की दिशा में ठोस कदम उठाए। इससे विद्यार्थियों, व्यापारियों, नौकरीपेशा लोगों और ग्रामीण क्षेत्र के अन्य यात्रियों को लंबे समय तक लाभ मिल सकता है।
अब बड़ा सवाल यही है कि क्या छह साल बाद मिली यह राहत स्थायी रेल सेवा की बहाली का रास्ता खोलेगी, या त्योहारों के बाद यात्रियों को फिर पुरानी परेशानी से जूझना पड़ेगा? क्षेत्र के लोगों को उम्मीद है कि रेलवे और जनप्रतिनिधि इस मुद्दे को गंभीरता से लेते हुए नियमित रेल सेवा बहाल कराने के लिए प्रयास करेंगे।









